गर्मी आ गई हैं और इस मौसम में एक क्रीम जो आपके दैनिक कॉस्मेटिक किट का हिस्सा होनी चाहिए वह है सनस्क्रीन। सूर्य इस ग्रह पर ऊर्जा का स्रोत है, हालांकि सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणों के लंबे समय तक संपर्क में रहने से धूप की कालिमा, तेजी से बुढ़ापा और कुछ मामलों में त्वचा का कैंसर भी हो सकता है। इसलिए रोजाना सनस्क्रीन लगाना बेहद जरूरी हो जाता है। हालांकि, यह चौंकाने वाली बात है कि बाज़ार में ज्यादातर कमर्शियल सनस्क्रीन जहरीले रसायनों से भरे होते हैं। जाहिर है, स्वयं खुद को सूरज की हानिकारक विकिरणों से बचाना चाहते हैं लेकिन ये नहीं चाहते कि एक जहरीला सनस्क्रीन हमारी त्वचा को नुकसान पहुंचाए।
सनस्क्रीन के फायदे-
गर्मियों में बाहर निकलने के लिए और अपने त्वचा को सूरज की अल्ट्रावायलेट किरणों से बचाने के लिए हमें सनस्क्रीन की जरूरत पढ़ती है। यह हमें सूरज की अल्ट्रावायलेट किरणों से बचाती है।जब हमारे शरीर के कुछ हिस्से बाहर निकले रहते हैं और सूरज की किरणों के कारण काले हो जाते हैं उसे टैनिंग कहते हैं। इस से बचने के लिए या तो आप अपने शरीर को धूप में ढक कर रखें या फिर एक अच्छी सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें। ( और पढ़ें..5 प्राकृतिक फेस माॅइस्चुराइजर। )
सनस्क्रीन कैसे लगाएं-
सनस्क्रीन लगाते समय यह ध्यान रखें की उसे अपने चेहरे पर मलें न , इसको हल्के हाथ से उंगलियों के औरों से गोलाकार की तरह लगाएं।
सबसे अच्छे सनस्क्रीन्स कौन से हैं-
मैंने बाजार से बहुत सारे सनस्क्रीन्स खरीदें और उनके इनग्रेडिएंट को चेक किया तो मुझे बहुत अफसोस हुआ कि जो ब्रांड सबसे ज्यादा फेमस है उन्हीं में सबसे ज्यादा जहरीले रसायन डले हुए हैं। मैंने इन सभी सनस्क्रीन को इनके इनग्रेडिएंट के हिसाब से इन्हें तीन कैटेगरी में विभाजित किया है। तो आइए शुरू करते हैं कैटेगरी 1 से-
कैटेगरी 1- इसमें आते हैं सनस्क्रीन्स जैैसे,वीएलसीसी,लेक्मे,लोटस,जॉय,गार्नियर,निविया, वेसलीन,
इन सभी सनस्क्रीन में सबसे खतरनाक रसायन डाले गए हैं। इनमें से कितने केमिकल्स थायराइड ग्लैंड को सही तरीके से काम करने से रोकते हैं। कुछ कह नहीं कर स्किन में बस कर और अंगों को नुकसान पहुंचाते हैं। अगर सौ बात की एक बात कहूं तो यह सनस्क्रीन्स सबसे बेकार हैं। अगर आप इनमें से किसी भी सनस्क्रीन का इस्तेमाल कर रहे हैं तो कृपया उसे चेंज कर दें। क्योंकि इन में मौजूद टॉक्सिक केमिकल्स, कॉस्मेटिक कलर्स, आर्टिफिशियल फ्रेगरेंस, खतरनाक प्रिजर्वेटिव्स, आपकी स्किन को प्रोटेक्ट नहीं बल्कि डैमेज करेंगे।
कैटेगरी 2- अब बात करते हैं कैटेगरी नंबर 2 की जिसमें आते हैं सनस्क्रीन जैसेे, बॉयोटिक,पतंजलि, और हिमालय,
यह सभी सनस्क्रीन्स पूरी तरह नेचुरल होने का दावा करती है लेकिन पूरे इनग्रेडिएंट बताने से कतराती हैं। बायोटिक नें अपने बायो संदल वुड स्क्रीन में सिर्फ 30% ही इनग्रेडिएंट बताए हैं बाकी के 70% इनग्रेडिएंट कहां है। क्या यह लोशन सिर्फ जड़ी बूटियों को मिक्स करके बनाया जा सकता है? गुमराह करने वाली बात है। पतंजलि तो इस से भी ऊपर निकला सिर्फ 5% हर्बल एक्सट्रैक्ट डाले हैं और बाकी का क्रीम बेस, इसमें क्या है हमें पता नहीं। साथ में यूरिया और कॉस्मेटिक कलर्स और आर्टिफिशियल फ्रेगरेंस। फिर भी इसको आयुर्वेदिक मेडिसिन कहकर बेच रहे हैं।हिमालया प्रोटेक्टिव सनस्क्रीन भी इसी कैटेगरी में आता है। तो दोस्तों इन नेचुरल सनस्क्रीन कहलाने वाले सनस्क्रीन से बचे जो सही में टॉक्सिक हैं। यह सभी सनस्क्रीन्स आपको फायदा पहुंचाने की बजाय नुकसान पहुंचाएंगे।
तो क्या ऐसी सनस्क्रीन हैं भारतीय मार्केट में जो 100% सेफ हो और दोपहर की गर्मी में सूरज की अल्ट्रा वॉयलेट किरणों से बचाए ,जी हां हैं इन्हें मैंने कैटेगरी 3 में रखा है-
कैटेगरी 3- सनस्क्रीन्स जैैैैसे
अरोमा मैजिकhttps://amzn.to/3fTXMk2
दी मौम्स को https://amzn.to/2Rrz6Ww
जस्ट हर्व नोसन https://amzn.to/2T5GPKx
स्वारस्या निव्र https://amzn.to/2TNXpPm
यह सभी सनस्क्रीन बिल्कुल नेचुरल है और इनका कोई भी साइड इफेक्ट नहीं है बिल्कुल सेफ है आप खुद इनके इनग्रेडिएंट चेक कर सकते हैं। आप इन को बे झिझक इस्तेमाल कर सकते हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में मैंने जो कुछ भी कहा है वह मेरी ईमानदार राय है। मैं किसी ब्रांड के साथ या उसके खिलाफ नहीं हूं। मैं किसी उत्पाद को उसकी योग्यता के आधार पर आंकता हूं। उल्लिखित कोई भी ब्रांड/उत्पाद प्रायोजित नहीं है जब तक कि स्पष्ट रूप से उल्लेख न किया जाए। उस मामले के लिए न तो प्रायोजित ब्रांड और न ही किसी अन्य ब्रांड/संगठन का इस ब्लॉग पर साझा किए गए विचारों पर कोई नियंत्रण है।
I wish you good health
Aasaan Upchar



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