आजकल की जिंदगी में लोग तरह तरह के खाने खाते हैं जैसे फास्ट फूड तली हुई चीजें ऐसे समोसे पकौड़ी चाऊमीन बर्गर वगैरा-वगैरा ऐसे बाहर के खाना खाने से लोगों के पेट में गैस बनने लगती है और डाइजेशन खराब होने लगता है और पेट में टॉक्सिन जमा होने लगता है लगातार ऐसे फास्ट फूड खाने से हमारे पेट में कब्ज बनने लगती है आज हम जानेंगे कि कब्ज कैसे बनती है और उसके क्या कारण है और कुछ आयुर्वेद के अनुसार उसके उपचार भी जानेंगे तो आइए शुरू करते हैं-
कब्ज क्या है?
बात, पित्त,कफ के असंतुलित हो जाने के कारण हमारे शरीर में रोग उत्पन्न होने लगते हैं जिससे हमारा पूरा शरीर घिर जाता है, गलत खानपान एवं जीवन शैली में लापरवाही करने से हमारी जट रागनी कमजोर पड़ जाती है, जिससे खाना सही तरीके से बच नहीं पाता और वह दूषित होकर शरीर में रोग उत्पन्न करने लगता है। मुख्य रूप से कब्ज में बात दोष ज्यादा बनने के कारण मल सूख जाता है जिसकी वजह से समय पर मल त्याग नहीं हो पाता।
कब्ज होने के कारण-
कब्ज होने के कई कारण हैं जैसे कि,
1. तरल पदार्थों का कम सेवन करना और पानी कम पीना।
2. रेशेदार आहार का भोजन कम करना।
3. तले हुए मिर्च मसालेदार एवं मैदे के बने हुए भोजन का सेवन करना।
4. भोजन समय पर ना करना।
5. रात में देर तक जागना।
6. सही समय पर खाना ना खाना।
7. चाय कॉफी सिगरेट तंबाकू का अधिक मात्रा में सेवन करना।
8. भूख ना लगने पर भी खाना खा लेना।
9. चिंता या तनाव युक्त जीवन जीना।
10. लंबे समय तक या अधिक मात्रा में दर्द निवारक दवाइयों का इस्तेमाल करना।
कब्ज के लक्षण-
- जोर लगाने पर मल त्याग होना
- पेट में भारीपन और दर्द होना।
- मल शूखा और कठोर होना।
- सिर में दर्द रहना।
- बदहजमी
- आलस से बना रहना।
- पिंडलियों में दर्द होना।
- मुंह से दुर्गंध आना।
- मुंह में छाले होना।
- त्वचा पर मुहासे एवं फुंसियां होना।
- एरंड का तेल,
- मुलेठी
- अजवाइन और जीरा
- बेल का फल
- सौंफ
- एरंड तेल ।
- अभ्यारिश्ट ।
- कुमारी असावा ।
- बेल शरबत ।
- बेल मुरब्बा ।
- बेल कैंडी ।

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